धार्मिक पर्व/ Hindu Festival

शरद पूर्णिमा 2026: श्रीराधा-कृष्ण की महारास लीला, आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि

📅 25 October 2026
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ब्रजभूमि में इस पूर्णिमा का संबंध श्रीराधा-कृष्ण की दिव्य रासलीला से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। वहीं अनेक परिवारों में मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव की आराधना और चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाती है।

🌼 त्योहार का महत्व

शरद पूर्णिमा 2026: श्रीराधा-कृष्ण की महारास लीला, आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि

ब्रजभूमि में इस पूर्णिमा का संबंध श्रीराधा-कृष्ण की दिव्य रासलीला से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। वहीं अनेक परिवारों में मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव की आराधना और चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाती है।

वर्ष की अनेक पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक आकर्षण है। वर्षा ऋतु के बाद जब आकाश निर्मल होने लगता है, वातावरण में शीतलता उतरती है और चंद्रमा की उजली आभा प्रकृति को एक शांत सौंदर्य से भर देती है, तब आश्विन मास की पूर्णिमा भक्तों के मन में विशेष श्रद्धा जगाती है।

शरद पूर्णिमा क्या है?

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा और शरद पूनम जैसे नामों से भी जाना जाता है।

ब्रज में इसका विशेष आकर्षण राधा-कृष्ण की रसमयी भक्ति से जुड़ा है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की उपासना और रात्रि-जागरण को अधिक महत्व दिया जाता है।

श्रीराधा-कृष्ण की महारास लीला का आध्यात्मिक संदेश

ब्रज की भक्ति परंपरा में शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण की महारास लीला के स्मरण से जुड़ी हुई है। भक्तिभाव से देखी जाने वाली यह लीला केवल एक उत्सव, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के प्रेमपूर्ण संबंध का प्रतीकात्मक अनुभव भी मानी जाती है।

रासलीला का भाव हमें यह समझने की प्रेरणा देता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार, स्वार्थ और अधिकार की भावना धीरे-धीरे कम होती है। जब मन अपने संकीर्ण आग्रहों से ऊपर उठकर ईश्वर के प्रेम में समर्पित होता है, तब भक्ति जीवन का आंतरिक आधार बन सकती है।

ब्रज के रसिक भक्त इस अवसर पर राधा-कृष्ण के नाम-स्मरण, भजन, कीर्तन और लीला-चिंतन में विशेष आनंद अनुभव करते हैं।

शरद पूर्णिमा का यह भाव हमें एक प्रश्न भी देता है—क्या हमारी भक्ति केवल पूजा के समय तक सीमित है, या हमारे व्यवहार में भी प्रेम, करुणा और विनम्रता दिखाई देती है?

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा क्यों है?

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने की परंपरा शामिल है। कई परिवार इसे भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

इस रात की चांदनी को अमृतमयी कहा गया है। इसी श्रद्धा के कारण खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा विकसित हुई।

शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि

वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर की सुबह तक रहने की जानकारी पंचांगों में दी गई है।

श्रीराधे! श्रीकृष्ण शरणं मम।

MereHari.com की ओर से सभी भक्तों को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। राधा-कृष्ण की कृपा से आपके जीवन में प्रेम, शांति, सद्बुद्धि और भक्ति का प्रकाश बना रहे।

🙏 पूजा विधि

शरद पूर्णिमा की सरल पूजा विधि

इस दिन पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सरलता से की जा सकती है।

1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा-स्थान की सफाई करें।
2. भगवान श्रीराधा-कृष्ण, मां लक्ष्मी और अपने आराध्य देव का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
3. दीपक जलाएं और पुष्प, फल, मिठाई या उपलब्ध सात्त्विक सामग्री अर्पित करें।
4. श्रीकृष्ण के नामों का जप करें, राधा-कृष्ण के भजन गाएं या कुछ समय भगवद्-लीला के चिंतन में बिताएं।
5. मां लक्ष्मी की आराधना करते हुए घर में सुख, शांति, सद्बुद्धि और सदाचार की प्रार्थना करें।
6. रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करके अपनी परंपरा के अनुसार अर्घ्य या प्रार्थना करें।
7. खीर या अन्य प्रसाद भगवान को अर्पित करें और परिवार के सदस्यों के साथ बांटें।
8. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तु का दान करें।

📖 पौराणिक कथा

शरद पूर्णिमा पर क्या करें?

- श्रीराधा-कृष्ण का नाम-स्मरण और भजन-कीर्तन करें।
- भगवद्गीता या श्रीमद्भागवत के किसी प्रेरणादायक प्रसंग का अध्ययन करें।